Wednesday, July 26, 2017

एक गीत -है वंदेमातरम् गीत मेरा

चित्र -गूगल से साभार 



एक गीत -है वन्देमातरम गीत मेरा 

यह दुनिया का स्वर्ग 
इसे हम भारत माता कहते हैं |
इसके पुत्र करोड़ों आपस में 
मिलजुल कर रहते हैं | |

हम सबकी इज्जत करते हैं 
हम सबको गले लगाते हैं ,
हम मानवता के रक्षक हैं 
हम गीत शांति के गाते हैं .
जो हमको आँख दिखाते हैं 
वो खण्डहरों सा ढहते हैं |

है वंदेमातरम् गीत मेरा 
जन गण मन मेरा गान रहे ,
इस मातृभूमि के कण -कण का 
दुनिया भर में सम्मान रहे ,
जिसके सिर छत्र हिमालय है 
चरणों में सागर बहते  हैं |

यह मिटटी कितनी प्यारी है 
अनगिन  रंगों के फूल यहाँ ,
बहुभाषा,संस्कृति बोली का 
ऐसा कोई स्कूल कहाँ ,
एकलव्य यहाँ बन जाते हैं 
जो झोपड़ियों में रहते हैं |
चित्र -गूगल से साभार 

Saturday, June 24, 2017

गंगा की वेदना -एक गीत -जन -जन का पाप हरे स्वयं बुरे हाल में



चित्र -गूगल से साभार 



गंगा की वेदना -एक गीत 

गंगा से प्रेम महज 
पूजा की थाल में |
शहरों में पांव फंसे 
गाद भरे जाल में |

आंख डबडबायी है 
धार धार रोती है ,
नींद में कराह रही 
मैया कब सोती है ,
जाने कब सीता सी 
गुम हो पाताल में |

शंकर के माथे से 
धवल धार आयी थी ,
फूलों की खुशबू से 
सृष्टि महमहायी थी ,
देखता भागीरथ चुप 
माँ को इस हाल में |

वसन हुए मैले सब 
चेहरे पर तेज नहीं ,
काँटों से राह भरी 
फूलों की सेज नहीं ,
एक महासागर थी 
समा गयी ताल में |

शक्तिहीन धारा में 
पर्व हम मनाते हैं ,
टूटते कगारों पर 
स्वस्ति -मन्त्र गाते हैं ,
जन -जन का पाप हरे 
स्वयं बुरे हाल में |
चित्र -गूगल से साभार 

Thursday, March 9, 2017

एक गीत -होली -आम कुतरते हुए सुए से



चित्र -गूगल से साभार 

आप सभी को होली की बधाई एवं शुभकामनाएँ 
एक गीत -होली 

आम कुतरते हुए सूए से 
मैना कहे मुंडेर की |
अबकी होली में ले आना 
भुजिया बीकानेर की |

गोकुल ,वृन्दावन की हो 
या होली हो बरसाने की ,
परदेसी की वही पुरानी
 आदत है तरसाने की ,
उसकी आँखों को भाती है 
कठपुतली आमेर की |

इस होली में हरे पेड़ की 
शाख न कोई टूटे ,
मिलें गले से गले 
पकड़कर हाथ न कोई छूटे ,
हर घर -आंगन महके खुशबू 
गुड़हल और कनेर की |

चौपालों पर ढोल मजीरे 
सुर गूंजे करताल के ,
रुमालों से छुट न पायें 
रंग गुलाबी गाल के ,
फगुआ गाएं या फिर 
बांचेंगे कविता शमशेर की |
[मेरे इस गीत को आदरणीय अरुण आदित्य द्वारा अमर उजाला में प्रकाशित किया गया था मेरे संग्रह में भी है |व्यस्ततावश नया लिखना नहीं हो पा रहा है |

चित्र -गूगल से साभार 

Tuesday, November 15, 2016

एक गीत -बुन रही होगी शरद की चांदनी


चित्र -गूगल से साभार 


एक गीत -बुन रही होगी शरद की चांदनी 

बुन रही होगी 
शरद की 
चांदनी स्वेटर गुलाबी |

दबे पांवों 
सीढ़ियाँ चढ़ 
हम छतों पर टहल आयें ,
कनखियों 
से देखकर फिर 
होठ काटें मुस्कुरायें ,
चलो ढूंढें 
फिर दराजों में 
पुराने ख़त जबाबी |

बांसुरी से 
कहाँ मुमकिन 
कठिन ऋतुओं को रिझाना ,
शाल ओढ़े 
कहीं देवानंद 
बनकर गुनगुनाना ,
नहीं होते हैं 
कहीं संगीत 
चिड़ियों के किताबी |

शून्य में 
अपलक निहारे 
टिमटिमाते हुए तारे ,
अब दिशाओं में 
नहीं माँ बोल 
मीठे हैं तुम्हारे !
कहीं अपनापन 
नहीं है 
ढूंढ आया किचन ,लाबी |


Wednesday, November 9, 2016

एक गीत -ये बनारस है



काशी /बनारस 


एक गीत -ये बनारस है 

ये बनारस है 
यहाँ रेशम न खादी है |
अष्टकमलों से 
महकती हुई वादी है |

वस्त्र तो इसके 
विचारों और मन्त्रों से बुने हैं 
इसे अपना घर स्वयं 
भगवान शंकर भी चुने हैं ,
यहाँ का कण -कण 
अघोरी या नमाजी है |

यहीं पर रैदास की वाणी 
पिघलती है 
गोद में लेकर इसे 
गंगा मचलती है 
यहाँ पूजा ,अर्चना 
प्रातः मुनादी है |

यहाँ घाटों पर 
चिलम के धुंए सजते हैं 
यहीं जीवन -मोक्ष के 
भी छंद रचते हैं 
यहाँ की हर एक सीढ़ी 
सरल -सादी है |

यह समय को रंग 
कितने रूप देता है 
यहाँ तुलसी छाँव 
कबिरा धूप देता है 
सभ्यताओं की 
यही माँ यही दादी है |

आरती गंगा जी की /सभी चित्र गूगल से साभार 

Wednesday, October 19, 2016

दो रचनाएँ -करवा चौथ -देख लेना तुम गगन का चाँद


चित्र -गूगल से साभार 

ये रचनाएँ दुबारा पोस्ट कर रहा हूँ सन २०१० में इन्हें पोस्ट कर चुका हूँ 
एक आज करवा चौथ का दिन है
आज करवा चौथ
का दिन है
आज हम तुमको संवारेंगे।
देख लेना
तुम गगन का चांद
मगर हम तुमको निहारेंगे।

पहनकर
कांजीवरम का सिल्क
हाथ में मेंहदी रचा लेना,
अप्सराओं की
तरह ये रूप
आज फुरसत में सजा लेना,
धूल में
लिपटे हुए ये पांव
आज नदियों में पखारेंगे।

हम तुम्हारा
साथ देंगे उम्रभर
हमें भी मझधार में मत छोड़ना,
आज चलनी में
कनखियों देखना
और फिर ये व्रत अनोखा तोड़ना ,
है भले
पूजा तुम्हारी ये
आरती हम भी उतारेंगे।

ये सुहागिन
औरतों का व्रत
निर्जला, पति की उमर की कामना
थाल पूजा की
सजा कर कर रहीं
पार्वती शिव की सघन आराधना,
आज इनके
पुण्य के फल से
हम मृत्यु से भी नहीं हारेंगे।

दो 
जमीं के चांद को जब चांद का दीदार होता है

कभी सूरत कभी सीरत से हमको प्यार होता है
इबादत में मोहब्बत का ही इक विस्तार होता है

तुम्हीं को देखने से चांद करवा चौथ होता है
तुम्हारी इक झलक से ईद का त्यौहार होता है

हम करवा चौथ के व्रत को मुकम्मल मान लेते हैं
जमीं के चांद को जब चांद का दीदार होता है

निराजल रह के जब पति की उमर की ये दुआ मांगें
सुहागन औरतों का स्वप्न तब साकार होता है

यही वो चांद है बच्चे जिसे मामा कहा करते
हकीकत में मगर रिश्तों का भी आधार होता है

शहर के लोग उठते हैं अलार्मों की आवाजों पर
हमारे गांव में हर रोज ही जतसार होता है

हमारे गांव में कामों से कब फुरसत हमें मिलती
कभी हालीडे शहरों में कभी इतवार होता है।
कवि -जयकृष्ण राय तुषार [स्वयं मैं ]


Sunday, October 2, 2016

जिलाधिकारी इलाहाबाद संजय कुमार की इलाहाबाद संग्रहालय में त्रिदिवसीय फोटो प्रदर्शनी



जिलाधिकारी इलाहाबाद -श्री संजय कुमार [I.A.S.]
संजय कुमार जिलाधिकारी इलाहाबाद की पुस्तक 

जिलाधिकारी संजय कुमार के फोटोग्राफ 
पेशेवर फोटोग्राफर्स को भी मात देते हुए -आज प्रदर्शनी का समापन 

कला और साहित्य किसी  पेशे के  मोहताज नहीं होते |यह हुनर जिसमें भी होगा उसे अभिव्यक्त करेगा ही चाहे कितनी भी मुश्किल हो |आमतौर पर प्रशासनिक सेवाओं में काम के दबाव में यह उम्मीद नहीं की जाती कि कोई जिलाधिकारी अपने साहित्य और कला को समय दे सकता है |लेकिन इस असम्भव को सम्भव कर दिखाया श्री संजय कुमार जी ने जो जिलाधिकारी इलाहाबाद के पद पर तैनात हैं |विगत तीन दिनों से इलाहाबाद संग्रहालय में उनके फोटोग्राफ की प्रदर्शनी लगी है ,आज उसका समापन है |आज मैं भी गया संयोग वश उसी समय उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त आदरणीय न्यायमूर्ति संजय मिश्र जी और न्यायमूर्ति श्री पंकज मित्तल भी आये थे |जिलाधिकारी महोदय एक  पेशेवर फोटोग्राफर की तरह उनको चित्रों की बारीकियां समझा रहे थे | संग्रहालय में निदेशक राजेश पुरोहित जी और उत्तर प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता श्री सी ० बी ० यादव भी साथ में थे | संजू मिश्र ने जिलाधिकरी मोहदय की चित्रों की बुकलेट भी मुझे दिया |ये चित्र संगम से लेकर पर्वतों ,अभ्यारण्यों तक के हैं नदी ,समुद्र चिड़िया ,वन्य जीव सभी जीवंत हैं |स्वभाव से हंसमुख मिलनसार माननीय जिलाधिकारी के फोटोग्राफ किसी भी पेशेवर फोटोग्राफर को मात दे रहे हैं | संजय कुमार 2002 बैच के  I.A.S.हैं और मूलतः औरंगाबाद बिहार के निवासी हैं |

उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त को अपने फोटोग्राफ दिखाते संजय कुमार 
वन्य जीव -फोटोग्राफी संजय कुमार [I.A.S.]
पुस्तक के फ्लैप से -[ इलाहाबाद की पक्षी विविधता ]
भारतीय प्रशासनिक सेवा २००२ बैच के अधिकारी संजय कुमार को वन्य जीवन तथा उसके छायांकन में विशेष रूचि है |इन्होने देश तथा विदेशों के अनेक राष्ट्रीय उद्यानों का भ्रमण कर वन्यजीवों एवं प्रकृति का अनगिनत छायांकन किया है और बहुत कम समय में अपना एक विशिष्ट स्थान बनाया है | इनके छायाचित्रों की कई प्रदर्शनियाँ भी आयोजित हुई हैं व् विभिन्न मंचों पर इनको छाया चित्रों के लिए पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जा चुका है |वन्य जीव विषय पर इनके अनेकों आलेख विभिन्न प्रतिष्ठित पर्यावरण एवं वन्य जीव पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं |

फोटो प्रदर्शनी में संजय कुमार जिलाधिकारी इलाहाबाद 


संजय कुमार के फोटोग्राफ प्रदर्शनी से साभार 
उपरोक्त सभी फोटोग्राफ जिलाधिकारी संजय कुमार जी के हैं प्रदर्शनी से साभार